Friday, January 6, 2012

कोई हसीं ख्वाब ढूंढते हैं...


दर्द भरी ज़िन्दगी का सुराग ढूंढते हैं...
हैं अंधेरों में गुम यहाँ कि चिराग 
ढूंढते हैं...

बनाया था तमाशा ज़िन्दगी का, कुछ इस तरह
कि उन मेहरबानियों को पता
 ढूंढते हैं...
 
कोई है... ? अंधेरों में, मेरे दिल की शमा जला दे
आज हम अपनी बदनसीबी का राज़ ढूंढते हैं...
 
हसरत का आईना ये पत्थर दिल से टूट गया 
शीशों के इन टुकड़ों में अपना आज ढूंढते हैं... 
 
माना कि तेरे लम्हों ने हमें झुलस के रख दिया
दिल को भुलाने के लिए कोई हसीं ख्वाब 
ढूंढते हैं..

2 comments:

  1. waaaah... bahut sundar rachna... :)

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  2. you are very talented...

    saas thum jaaye par ehsas na alag ho ne paaye
    appke shabdo ke aagosh main din raay ek ho jaaye.

    -Anand

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