Tuesday, July 26, 2011

तेरे बिना



हमारे ना होने से कुछ भी नहीं बदला,
ये सूरज भी वहीँ से निकलता है,
आसमान पे तारे भी निकलते हैं,
और चाँद की चांदनी भी होती है...




हवा भी चलती है,
नदियाँ भी बहती हैं,
फूल भी खिलते हैं,
इनमें खुशबु भी होती है...





संसार भी चलता है,
लोग भी अपने अपने काम में मस्त हैं 
सब कुछ वही तो है
और वैसा ही है...








लेकिन,
ना जाने क्यूँ,
तुम्हारे ना होने से हर चीज अधूरी सी लगती है,
हर सुबह, शाम सी लगती है,
हर मुस्कान उदास सी लगती है,
हर महफ़िल अन्जान सी लगती है,
हर धड़कन बेजान सी लगती है,
सच तो ये है कि 
सारी दुनिया वीरान सी लगती है...




- सृजना

2 comments:

  1. Nee feel ento ardhamavthundhi raa...

    Nijam gaa ee poem loo ee shayari loo

    ninnee chusthunnaanu.............

    nijam gaa ntho baadha padithene gaani ilaanti

    feeel raadhu... Adhi bharinchee vaallakee

    telusthundhi ra Srujana ga

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